‘कवच’ सिर्फ एक तकनीक नहीं, बल्कि भारतीय रेल यात्रियों के लिए सुरक्षा का एक अभेद्य वादा है।
भारतीय रेलवे दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्कों में से एक है। हर दिन करोड़ों यात्री इसमें सफर करते हैं, और ऐसे में यात्रियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। पिछले कुछ वर्षों में, रेलवे ने एक ऐसी स्वदेशी तकनीक (indigenous technology) को विकसित करने पर जोर दिया है जो ट्रेन दुर्घटनाओं, विशेष रूप से आमने-सामने की टक्कर (head-on collision), को पूरी तरह से रोक सके। इस तकनीक का नाम है: ‘कवच’ (Kavach)।
‘कवच’ भारतीय रेलवे द्वारा विकसित एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (Automatic Train Protection – ATP System) है, जिसे भारत में ही डिजाइन और निर्मित किया गया है। यह सुरक्षा के मामले में एक गेम-चेंजर साबित हो रही है।

क्या है ‘कवच’ और यह कैसे काम करता है?
‘कवच’ एक जटिल इलेक्ट्रॉनिक प्रणाली है जो रेलवे के लोकोमोटिव (इंजन), सिग्नलिंग सिस्टम और पटरियों (tracks) पर लगे उपकरणों का एक नेटवर्क है। यह तीन मुख्य सिद्धांतों पर काम करता है:
ट्रेन की गति पर नियंत्रण (Speed Control):
अगर ड्राइवर किसी गति सीमा वाले क्षेत्र में ट्रेन को तय सीमा से तेज़ चलाता है, तो ‘कवच’ स्वचालित रूप से ड्राइवर को चेतावनी देता है।
यदि ड्राइवर प्रतिक्रिया नहीं करता है, तो सिस्टम खुद ही ब्रेक लगा देता है और ट्रेन की गति को नियंत्रित करता है।
टक्कर से बचाव (Collision Prevention):
सबसे महत्वपूर्ण कार्य यह है कि ‘कवच’ एक ही ट्रैक पर विपरीत दिशा से आ रही दो ट्रेनों को एक-दूसरे के पास आने से रोकता है।
यह लोकोमोटिव में लगे उपकरणों (Loco equipment), ट्रैकसाइड उपकरण (Trackside equipment) और रेडियो संचार टॉवरों (Radio Communication Towers) के माध्यम से लगातार ट्रेनों की स्थिति और दूरी की निगरानी करता है। यदि दो ट्रेनें खतरनाक ढंग से करीब आती हैं, तो ‘कवच’ दोनों ट्रेनों के ब्रेक स्वचालित रूप से सक्रिय (activate) कर देता है।
सिग्नल पासिंग वार्निंग (Signal Passing Warning):
यदि कोई ड्राइवर ‘खतरे’ (Danger) के लिए निर्धारित लाल सिग्नल को पार करने की कोशिश करता है, जिसे SPAD (Signal Passed at Danger) कहा जाता है, तो ‘कवच’ तुरंत ब्रेक लगाकर ट्रेन को सिग्नल से पहले ही रोक देता है।
‘कवच’ की प्रमुख विशेषताएं
| विशेषता | महत्व |
| स्वदेशी तकनीक | यह भारत में विकसित हुई है, जिससे इसकी लागत कम है और इसे भारतीय रेल की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार आसानी से अनुकूलित (customize) किया जा सकता है। |
| पुनरावृत्ति (Redundancy) | इसमें कई परत वाली सुरक्षा प्रणाली (Multi-layer Safety System) है। यदि एक कॉम्पोनेन्ट विफल हो जाता है, तो दूसरा बैकअप के रूप में काम करता है। |
| कुशल संचार | यह अल्ट्रा हाई फ्रीक्वेंसी (UHF) रेडियो संचार का उपयोग करके 5 किलोमीटर तक की दूरी पर भी लगातार डेटा का आदान-प्रदान करता है। |
| कोहरे में सहायक (Fog Assistance) | घने कोहरे या खराब मौसम की स्थिति में, ‘कवच’ ड्राइवर को कैब (इंजन) के अंदर ही सिग्नल की स्थिति और गति सीमा की स्पष्ट जानकारी देता है। |
कवच: वर्तमान स्थिति और भविष्य की योजना
भारतीय रेलवे ने शुरुआत में दक्षिण मध्य रेलवे (South Central Railway) के व्यस्त मार्गों पर कवच प्रणाली को लागू करना शुरू किया था। इसका लक्ष्य अगले कुछ वर्षों में देश के लगभग 6,000 किलोमीटर से अधिक रेल नेटवर्क पर इसे लागू करना है।
सरकार ने इसके विस्तार के लिए बड़े पैमाने पर बजट आवंटित किया है। यह न केवल यात्रियों के लिए ट्रेन यात्रा को सुरक्षित बना रहा है, बल्कि रेलवे संचालन को भी अधिक कुशल और समय पर (punctual) बनाने में मदद कर रहा है।
निष्कर्ष
‘कवच’ भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण और सुरक्षा मानकों को वैश्विक स्तर पर ले जाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आपकी वेबसाइट, जो तकनीक और रेलवे अपडेट्स पर केंद्रित है, के लिए यह जरूरी है कि आप इस महत्वपूर्ण तकनीक की प्रगति पर लगातार खबरें देते रहें। यह तकनीक हर भारतीय रेल यात्री के लिए सुरक्षा और विश्वास का प्रतीक है।

